तकनीक से बेहतर होते इलेक्ट्रॉनिक लॉक्स

जब मानव जीवन शुरु हुआ न तो उसका अपना घर था और ना ही ऐसा कोई सामान जिसे सुरक्षा की आवश्यकता हो. सामान की सुरक्षा भी होनी चाहिए इस बात का ज्ञान भी समय के साथ ही मानव को आया. समय के साथ ही उसने सामान की सुरक्षा शुरू की और उसी के साथ आविष्कार हुआ तालों का.

सामान पर ताला लगाने की जब शुरुआत हुई तब सबसे पहले बड़े से ताले चाभी के साथ आये और सदियों तक वो ही चलते रहे, हालाँकि इस तालों के साथ भी विभिन्न प्रयोग होते रहे कभी इनमे चाभी लगाने का स्थान आगे रहा कभी नीचे. इन तालों में चाभी का स्थान भी नंबर सिस्टम ने ले लिया. लेकिन तालों के क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन आया जब तकनीक ने इलेक्ट्रॉनिक लॉक के रूप में तालों का डिजिटलीकरण किया.

तकनीक से बेहतर होते इलेक्ट्रॉनिक लॉक्स
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क्या हैं इलेक्ट्रॉनिक लॉक्स:

डिजिटल लॉक मैकेनिकल रूप से नियंत्रित ना होकर, इलेक्ट्रिक करंट से नियंत्रित होते हैं ये लॉक्स मुख्य रूप से दो तरह के होते हैं- 1. पूरी तरह से इलेक्ट्रिक करंट से नियंत्रित, 2. इलेक्ट्रिक और चाभी दोनों के द्वारा नियंत्रित. डिजिटल लॉक का सबसे बड़ा फायदा ये है कि इसे बिना विशेष कोड या सिग्नल के नहीं खोला जा सकता.

तकनीक ने ही इलेक्ट्रॉनिक लॉक्स का निर्माण किया और तकनीक ही इसे और विकसित कर रही है. तकनीक की मदद से इन लॉक्स में आये कुछ मुख्य सुधार निम्न हैं.

त्वरित प्रोग्रामिंग:

प्रोग्रामिंग किसी भी इलेक्ट्रोनिक उपकरण का एक अहम भाग होता है. बिना प्रोग्रामिंग के कोई भी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण काम नहीं कर सकता. जैसे जैसे टेक्नोलॉजी प्रगति कर रही है इलेक्ट्रोनिक लॉक्स की प्रोग्रामिंग भी तेज़ हुई है. पहले जहाँ एक लॉक सिर्फ एक ही काम के लिए प्रोग्राम होता था अब वो एक से ज्यादा के लिए भी प्रोग्राम हो सकता है. उदाहरण के लिए जहाँ पहले ये लॉक सिर्फ बटन से सेंसिटिव होते थे और दबाने पर खुलते या बंद होते थे अब ये अलार्म से लेकर अटेंडेंस रिकॉर्ड तक के भी काम आ रही है.

अन्तर्निहित ऑडिट सुविधा:

इलेक्ट्रॉनिक लॉक से जुडी हुई सारी एन्ट्री रिकॉर्ड करने के लिए पहले अलग से सिस्टम लगाना पड़ता था जबकि अब ये खुद उसी लॉक में रिकॉर्ड हो सकते हैं. अन्तर्निहित ऑडिट सुविधा के होने से एक अलग सिस्टम रखने के आवश्यकता से मुक्ति मिल जाती है.

रिमोट संचालित:

अपने शुरुआती दिनों में इलेक्ट्रॉनिक लॉक सिर्फ नंबर या बायोमेट्रिक से ही नियंत्रित हो पते थे लेकिन अब ये रिमोट से भी नियंत्रित हो सकते हैं. रिमोट से नियंत्रित होने से भौतिक रूप में लॉक के पास मौजूद होने की जरूरत नहीं होती.

जैसे जैसे तकनीक बढ़ती जा रही है अपराध और सुरक्षा व्यवस्था दोनों ही अपने में बढ़ते जा रहे हैं. इलेक्ट्रॉनिक लॉक्स ने भी तकनीक के साथ विकास किया है और सतत जारी है.